मणिपुर में राष्ट्रपति शासन समाप्त। युमनाम खेमचंद सिंह ने CM पद की शपथ ली। दो उप मुख्यमंत्री भी नियुक्त। जानें पूरी खबर।
इंफाल। करीब एक साल तक राष्ट्रपति शासन के बाद मणिपुर में बुधवार को नई सरकार का गठन हो गया। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ विधायक युमनाम खेमचंद सिंह ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की।
राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने शाम 6 बजे लोक भवन में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही दो उप मुख्यमंत्री समेत चार मंत्रियों ने भी शपथ ली।
राष्ट्रपति शासन से मुक्त हुआ मणिपुर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 4 फरवरी 2026 से प्रभावी होने वाली अधिसूचना जारी कर राज्य से राष्ट्रपति शासन वापस ले लिया। संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत जारी इस आदेश के बाद मणिपुर में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हुआ।
गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया कि 13 फरवरी 2025 को लगाया गया राष्ट्रपति शासन अब समाप्त किया जाता है।
मणिपुर में पिछले साल 9 फरवरी को तत्कालीन मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इस्तीफा दे दिया था। राज्य में मई 2023 से मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय हिंसा जारी थी।
इस संघर्ष में 260 से अधिक लोग मारे गए, करीब 1500 घायल हुए और 70 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हुए। लगातार तनाव और हिंसा के चलते केंद्र ने 13 फरवरी 2025 को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया था।
नई सरकार में दो उप मुख्यमंत्री
नई सरकार में समावेशी प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता दी गई है। कुकी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली BJP विधायक नेमचा किपगेन ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
मौजूदा हालात को देखते हुए उन्होंने नई दिल्ली स्थित मणिपुर भवन से वर्चुअल माध्यम से शपथ ग्रहण की। नागा पीपुल्स फ्रंट के विधायक लोशी दिखो को भी उप मुख्यमंत्री बनाया गया है।
इसके अलावा BJP के गोविंदास कोंथौजम और नेशनल पीपुल्स पार्टी के खुराइजम लोकेन सिंह ने मंत्री पद की शपथ ली। सूत्रों के अनुसार कोंथौजम को गृह विभाग का जिम्मा मिल सकता है।
नेमचा किपगेन नई सरकार में एकमात्र महिला मंत्री हैं। उन्हें कुकी समुदाय का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी दी गई है।
कौन हैं युमनाम खेमचंद सिंह
62 वर्षीय खेमचंद सिंह मैतेई समुदाय से आते हैं। वह इंफाल पश्चिम जिले के सिंगजमेई विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं।
उन्होंने 2017 में पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया। पहली बीरेन सिंह सरकार में 2017 से 2022 तक वह विधानसभा अध्यक्ष रहे।
2022 में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया और उन्होंने ग्रामीण विकास, पंचायती राज तथा शिक्षा विभाग संभाला। फरवरी 2025 तक वह मंत्री पद पर रहे।
जनवरी 2026 में भाजपा विधायक दल की बैठक में उन्हें सर्वसम्मति से नेता चुना गया। मंगलवार को दिल्ली में हुई बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने स्वयं उनका नाम प्रस्तावित किया था।
केंद्रीय पर्यवेक्षक तरुण चुग और भाजपा के पूर्वोत्तर समन्वयक संबित पात्रा इस बैठक में मौजूद थे। सभी विधायकों ने खेमचंद सिंह के नाम पर सहमति जताई।
राजनीति के अलावा खेमचंद सिंह ताइक्वांडो से गहरा जुड़ाव रखते हैं। वह ब्लैक बेल्ट होल्डर हैं और टैक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया के पूर्व उपाध्यक्ष रह चुके हैं।
उन्होंने राम लाल पॉल हाई स्कूल इंफाल से 1978 में हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी की। वह लंबे समय से RSS से जुड़े हुए हैं और संगठनात्मक कार्यों में अनुभवी माने जाते हैं।
विधानसभा में NDA का स्पष्ट बहुमत
60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में भाजपा के पास 37 विधायक हैं। सहयोगी दल नेशनल पीपुल्स पार्टी के 6 विधायक और नागा पीपुल्स फ्रंट के 5 विधायक हैं।
इसके अतिरिक्त 3 निर्दलीय विधायक भी NDA को समर्थन दे रहे हैं। इस प्रकार गठबंधन के पास सदन में स्पष्ट बहुमत है।
बुधवार सुबह जब खेमचंद सिंह दिल्ली से इंफाल एयरपोर्ट पहुंचे तो पार्टी कार्यकर्ताओं और विधायकों ने उनका स्वागत किया।
इसके बाद वह केंद्रीय पर्यवेक्षक तरुण चुग, संबित पात्रा, पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह और राज्य भाजपा अध्यक्ष अधिकारीमयुम शारदा देवी के साथ राजभवन पहुंचे।
राज्यपाल से मुलाकात के दौरान उन्होंने सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश किया। राज्यपाल ने सभी दस्तावेजों की जांच के बाद सरकार गठन की मंजूरी दी।
शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद रहे वरिष्ठ नेता
शपथ ग्रहण समारोह में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय विशेष रूप से उपस्थित रहे। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी वर्चुअल माध्यम से समारोह में हिस्सा लिया।
राज्य के सभी विधायक, पूर्वोत्तर के कई नेता और भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी इस अवसर पर मौजूद थे।
समारोह सादगी के साथ संपन्न हुआ। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
शांति बहाली सबसे बड़ी चुनौती
शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने कहा कि वह राज्य में सभी समुदायों के बीच सहानुभूति, करुणा और सद्भाव बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
उन्होंने कहा, “मणिपुर की जनता ने लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों का सामना किया है। अब शांति और विकास की जरूरत है। हम सभी समुदायों को साथ लेकर चलेंगे।”
भाजपा ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि खेमचंद सिंह के अनुभवी और दूरदर्शी नेतृत्व में मणिपुर शांति, विकास और सुशासन की राह पर आगे बढ़ेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताते हुए नए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने यह जिम्मेदारी विनम्रता और गहरी प्रतिबद्धता के साथ स्वीकार की है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और सभी विधायकों को भी उन्होंने धन्यवाद दिया।
आगे क्या होगा
नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती जातीय तनाव को कम करना और शांति बहाल करना है। पिछले तीन वर्षों से जारी हिंसा ने राज्य को गहरे घाव दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार में विभिन्न समुदायों को प्रतिनिधित्व देना सही दिशा में उठाया गया कदम है। लेकिन असली परीक्षा जमीनी स्तर पर शांति बहाली की होगी।
अगले कुछ दिनों में मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है। सूत्रों के अनुसार 8-10 और मंत्रियों को शामिल किया जा सकता है।
सरकार की प्राथमिकताओं में कानून-व्यवस्था, विस्थापितों की वापसी और आर्थिक गतिविधियों को पटरी पर लाना शामिल होगा।
मुख्य बिंदु
• युमनाम खेमचंद सिंह ने मणिपुर के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली
• 4 फरवरी 2026 से राज्य में राष्ट्रपति शासन समाप्त हुआ
• नेमचा किपगेन और लोशी दिखो उप मुख्यमंत्री बने
• 13 फरवरी 2025 से राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू था
• जातीय हिंसा के चलते बीरेन सिंह ने 9 फरवरी 2025 को इस्तीफा दिया था
• खेमचंद सिंह 2017 से 2022 तक विधानसभा अध्यक्ष रहे
• NDA के पास 60 सदस्यीय सदन में स्पष्ट बहुमत है
• शांति बहाली और विकास नई सरकार की प्राथमिकता
