काठमांडू/नई दिल्ली | 10 सितंबर 2025 – नेपाल में सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर बैन लगाने के बाद शुरू हुआ विरोध अब बड़े जनांदोलन का रूप ले चुका है। राजधानी काठमांडू सहित कई शहरों में हिंसक प्रदर्शन, आगजनी और पुलिस से झड़पों के बीच प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। हालात बिगड़ने पर नेपाल सरकार ने सेना को तैनात कर दिया है और कई इलाकों में कर्फ़्यू लगाया गया है।
23 से ज्यादा लोगों की मौत, संसद भवन में आगजनी

पिछले दो दिनों में हुई झड़पों में कम से कम 23 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें सुरक्षा बल और प्रदर्शनकारी दोनों शामिल हैं। आक्रोशित भीड़ ने संसद भवन और राजनीतिक दलों के दफ़्तरों में आग लगा दी। नेपाल की सड़कों पर युवा वर्ग—खासतौर से जेनरेशन-ज़ी (Gen Z)—सरकार के खिलाफ मोर्चा संभाले हुए हैं।
सोशल मीडिया बैन से भड़का गुस्सा

नेपाल सरकार ने हाल ही में फेसबुक, इंस्टाग्राम और टिकटॉक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर बैन लगा दिया था। यह कदम युवाओं के लिए अभिव्यक्ति पर अंकुश के तौर पर देखा गया और यही निर्णय बड़े आंदोलन की वजह बना। सरकार ने अब बैन हटाने की घोषणा कर दी है, लेकिन प्रदर्शनकारी केवल इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। वे अब भ्रष्टाचार पर रोक और राजनीतिक सुधार की मांग कर रहे हैं।
भारत पर सीधा असर

- भारत-नेपाल सीमा पर अलर्ट: सोनौली बॉर्डर पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। कई भारतीय यात्री और बारातें पैदल सीमा पार करने को मजबूर हुईं।
- पर्यटन और व्यापार पर असर: गोरखपुर और अन्य बॉर्डर ज़िलों में होटल और पर्यटन कारोबार प्रभावित हुआ है।
- हवाई सेवाओं पर रोक: काठमांडू का त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट सेना के कब्ज़े में है। कई फ्लाइट्स लखनऊ और दिल्ली डायवर्ट की गईं। इंडिगो और अन्य एयरलाइंस ने अस्थायी रूप से उड़ानें रोक दी हैं।
राजनीतिक भविष्य पर सवाल

प्रधानमंत्री ओली के इस्तीफ़े के बाद नेपाल की राजनीति एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में है। पिछले एक दशक से देश लगातार राजनीतिक अस्थिरता झेल रहा है और कोई भी सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा आंदोलन केवल सरकार बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सिस्टम में बड़े बदलाव की मांग कर रहा है।
निष्कर्ष
नेपाल का यह आंदोलन सिर्फ सोशल मीडिया बैन से शुरू होकर अब एक राष्ट्रीय विद्रोह का रूप ले चुका है। सेना की तैनाती और पीएम के इस्तीफ़े के बावजूद प्रदर्शन जारी हैं। आने वाले दिनों में यह तय करेगा कि नेपाल अपने राजनीतिक भविष्य को किस दिशा में ले जाएगा और इसका असर भारत-नेपाल संबंधों पर कितना गहरा होगा।