
भारत की राजनीति में 2025 का साल ऐतिहासिक साबित हुआ है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल रहे C.P. राधाकृष्णन को देश का 15वाँ उपराष्ट्रपति चुना गया है। संसद भवन में हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने विपक्ष के उम्मीदवार पर निर्णायक जीत दर्ज की। यह जीत न केवल भाजपा के लिए एक बड़ी राजनीतिक सफलता है बल्कि आने वाले वर्षों की राजनीति के समीकरणों को भी गहराई से प्रभावित करेगी।
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उपराष्ट्रपति पद का महत्व
उपराष्ट्रपति भारत का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है। यह पद न केवल देश की गरिमा से जुड़ा है बल्कि राज्यसभा के सभापति के रूप में इसकी भूमिका और भी अहम हो जाती है।
राज्यसभा की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाना।
राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में जिम्मेदारियाँ संभालना।
संवैधानिक ढांचे में संतुलन बनाए रखना।
इस लिहाज़ से, C.P. राधाकृष्णन की नियुक्ति संसद और राजनीति दोनों पर गहरा असर डालेगी।
C.P. राधाकृष्णन का राजनीतिक सफर
C.P. राधाकृष्णन का नाम भारतीय राजनीति में किसी परिचय का मोहताज नहीं है।
वे लंबे समय तक भाजपा से जुड़े रहे।
कोयंबटूर (तमिलनाडु) से दो बार लोकसभा सांसद रहे।
भाजपा संगठन में कई अहम पदों पर काम किया।
2021 में उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
सादगी और संगठनात्मक क्षमता के लिए वे हमेशा चर्चित रहे हैं।
उनकी यह यात्रा उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च पद तक ले आई है।
चुनाव प्रक्रिया और परिणाम
भारत के उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा किया जाता है।
कुल वोटिंग पावर: लोकसभा + राज्यसभा सांसद।
चुनाव में गुप्त मतदान पद्धति अपनाई जाती है।
जीत के लिए साधारण बहुमत की आवश्यकता होती है।
2025 के चुनाव परिणाम:
C.P. राधाकृष्णन: लगभग 65% वोट।
विपक्षी उम्मीदवार: 35% वोट।
यह साफ़ दिखाता है कि राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा का दबदबा कायम है।
विपक्ष की स्थिति
विपक्ष ने उपराष्ट्रपति चुनाव में अपना उम्मीदवार उतारा, लेकिन संयुक्त रणनीति की कमी और आंतरिक मतभेदों ने हार को पक्का कर दिया।
कई विपक्षी सांसदों ने क्रॉस-वोटिंग की।
विपक्ष एकजुट होकर अभियान नहीं चला सका।
यह हार विपक्ष की भविष्य की रणनीति पर सवाल उठाती है।
भाजपा की रणनीति
भाजपा ने अपने संगठन और राजनीतिक प्रबंधन के बल पर यह चुनाव आसान बना लिया।
सहयोगी दलों का पूरा समर्थन मिला।
संगठन स्तर पर सांसदों को लाइन में रखा गया।
मोदी और शाह की रणनीतिक सोच यहाँ भी सफल रही।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर C.P. राधाकृष्णन के उपराष्ट्रपति बनने पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई।
समर्थकों ने इसे “नया युग” कहा।
विपक्ष के समर्थकों ने इसे “लोकतांत्रिक असंतुलन” बताया।
आम जनता में मिश्रित भावनाएँ नज़र आईं।
भविष्य की राजनीति पर असर
1. राज्यसभा की कार्यवाही में भाजपा को अब अतिरिक्त मजबूती मिलेगी।
2. विपक्ष को अपनी रणनीति पर गंभीरता से पुनर्विचार करना होगा।
3. दक्षिण भारत की राजनीति पर इसका बड़ा प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि राधाकृष्णन तमिलनाडु से आते हैं।
विपक्ष के लिए सबक
अगर विपक्ष आने वाले लोकसभा चुनावों में मज़बूत चुनौती देना चाहता है, तो उसे एकजुट होना पड़ेगा।
केवल चुनावी गठबंधन नहीं, बल्कि वैचारिक और नेतृत्व का सामंजस्य भी आवश्यक होगा।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ
कुछ पड़ोसी देशों और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने इस चुनाव पर प्रतिक्रिया दी।
विदेशी अखबारों ने भाजपा की रणनीतिक बढ़त को हाइलाइट किया।
विश्लेषकों ने कहा कि भारत में लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका और भी मज़बूत हो रही है।