तीन दिन की उम्र में छोड़े गए फाल्गुन अब नीदरलैंड्स के हीमस्टेड शहर के मेयर हैं

नागपुर | 27 जनवरी 2026
महाराष्ट्र के नागपुर में जन्म के तीन दिन बाद अनाथालय में छोड़े गए एक बच्चे की कहानी आज अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय है। नीदरलैंड्स में पले-बढ़े फाल्गुन बिन्नेंडिज्क अब हीमस्टेड शहर के मेयर हैं और अपनी जैविक मां की तलाश में 40 साल बाद भारत लौटे हैं।
10 फरवरी 1985 की सुबह, नागपुर स्थित मातृ सेवा संघ अनाथालय में एक युवा महिला ने अपने नवजात शिशु को छोड़ा। संस्था के रिकॉर्ड के अनुसार, वह 21 वर्षीय अविवाहित थी और सामाजिक दबाव के कारण बच्चे को छोड़ने पर मजबूर हुई।
अंबाझरी रोड स्थित इस आश्रय गृह में करीब एक महीने तक रहने के दौरान एक नर्स ने उस शिशु का नाम ‘फाल्गुन’ रखा। कुछ हफ्तों बाद एक डच दंपती ने उसे गोद ले लिया और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर फाल्गुन को नीदरलैंड्स ले जाया गया।
वहां उन्हें प्यार भरी परवरिश मिली। उच्च शिक्षा और सार्वजनिक जीवन में सफलता के बाद वे हीमस्टेड के मेयर बने। इसके बावजूद, अपनी जैविक पहचान और जड़ों की तलाश उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी रही।
2017 में उन्होंने अपनी खोज शुरू की। नागपुर स्थित मातृ सेवा संघ से संपर्क किया गया, लेकिन सीमित दस्तावेजों के कारण कोई ठोस सुराग नहीं मिला। बाद में जिला प्रशासन की मदद से पुराने अस्पताल और नगरपालिका रिकॉर्ड की जांच हुई।
दिसंबर 2025 में प्रशासन ने उस रिटायर्ड नर्स का पता लगाया जिसने शिशु को फाल्गुन नाम दिया था। 40 साल बाद हुई मुलाकात भावुक रही और दोनों की आंखें नम हो गईं। इस घटना ने फाल्गुन की खोज को नया अर्थ दिया।
अंतरराष्ट्रीय गोद लेने की प्रक्रिया के तहत पिछले दशकों में हजारों भारतीय बच्चों को विदेशों में गोद लिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार जैविक पहचान की खोज कई दत्तक बच्चों के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
Latest Update
फाल्गुन की जैविक मां की खोज अभी जारी है। प्रशासन पुराने दस्तावेजों के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया तेज कर रहा है।
“हर कर्ण को अपनी कुंती से मिलने का अधिकार है।” — फाल्गुन
